दतिया के बीर सिंह महल का एक नाम सतखंडा है। इसकी मंजिलें गिनने में जमीन के नीचे के हिस्से भी ध्यान में रखने पड़ते हैं। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण इसे ‘सात मंजिला’ या ‘सतखंडा’ महल कहता है, फिर उसी विवरण में पत्थर की पट्टियों से अलग दिखने वाले पांच ऊपरी तल गिनाता है। जिला प्रशासन भी पांच दिखाई देने वाली मंजिलों के साथ चट्टान काटकर अलग-अलग स्तरों पर बनाए गए भूमिगत कमरों का उल्लेख करता है। इसीलिए इसकी ऊंचाई को समझने के लिए जमीन के नीचे और भीतर की योजना जरूरी है।

चौकोर किला, बीच में अलग राज-आवास

महल ऊंचे चबूतरे पर चौकोर योजना में बना है। चार कोनों के अष्टकोणीय टावर उस चौकोर घेरे को तोड़ते हैं। भीतर केंद्रीय आंगन में राजपरिवार का अलग पांच मंजिला आवास-टावर उठता है। चौथी मंजिल पर संकरे, ऊंचे पुलनुमा गलियारे इसे हर दिशा के मध्य भाग से जोड़ते हैं। आँगन के अलग-अलग स्तरों पर खुले रास्ते, छतरियाँ और छज्जे दिखाई देते हैं। केंद्रीय भवन तक पहुँचने के लिए यह ऊँचा रास्ता पूरे चौकोर परिसर की योजना में शामिल है।

रोशनी, छाया और गर्मी का हिसाब

मुख्य प्रवेश पूर्व में रखा गया है और दक्षिण-पश्चिम की ओर जलाशय दिखाई देता है। जमीन के नीचे चट्टान में कटे कक्ष गर्म मौसम के निवास के रूप में बताए गए हैं। ऊपर झरोखे, पत्थर की टेक पर टिके छज्जे, छोटी छतरियां, मेहराब और बाहर निकले छज्जों के हिस्से दीवारों पर गहरी छाया बनाते हैं। केंद्रीय गुंबद लगभग 35 मीटर ऊंचा बताया गया है। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के अनुसार कक्षों की योजना रोशनी, हवा और एकांत को संतुलित करती है। नीचे के कमरे और ऊपर के खुले गलियारे गर्मी के मौसम से निपटने की अलग-अलग व्यवस्थाएँ दिखाते हैं।

एक तारीख पर सहमति नहीं

आधिकारिक स्रोत निर्माण-वर्ष पर पूरी तरह एकमत नहीं हैं। दतिया जिला पृष्ठ एक जगह 1614 और दूसरी जगह 1620 लिखता है। प्राधिकरण का दस्तावेज 1614 में काम शुरू होने और नौ वर्ष में पूरा होने की परंपरा दर्ज करता है। इन विवरणों को साथ रखें तो निर्माण सत्रहवीं सदी के आरंभ का है। आधिकारिक स्थापत्य-विवरण के अनुसार, पत्थर और ईंट से बने इस ढांचे में लकड़ी और लोहे के बिना विशाल चौकोर घेरा, भूमिगत हिस्से और हवा में जुड़े मार्ग एक ही वास्तु-योजना में रखे गए।

मुख्य बातें

  • राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण इसे सात मंजिला महल कहता है, पर बाहरी रेखाओं में पांच तल स्पष्ट गिनता है।
  • चौथी मंजिल के ऊंचे पुलनुमा गलियारे केंद्रीय आवास को चारों दिशाओं के हिस्सों से जोड़ते हैं।
  • निर्माण पत्थर और ईंट से है; आधिकारिक विवरण लकड़ी और लोहे का उपयोग न होने की बात दर्ज करते हैं।

स्रोत और संदर्भ

  1. National Monuments Authority, Ministry of Culture · Heritage Bye-Laws for Bir Singh Palace at Datia (2023; public-notice file) ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. District Datia, Government of Madhya Pradesh · Culture & Heritage — Bir Singh Palace ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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